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ओटीआर आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों को कोटे तक सीमित करने की बड़ी साज़िश – लौटन राम निषाद वन टाइम रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता पूरी तरह आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों के साथ नाइंसाफी

लखनऊ/उत्तर प्रदेश। भारतीय ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता लौटन राम राम निषाद ने यूपीपीएससी की प्रतियोगी परीक्षाओं में ओटीआर की अनिवार्यता को ओबीसी, एससी, एसटी वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों को अनारक्षित में समायोजन से वंचित करने की साज़िश बताया है। प्रतियोगी परीक्षा के आवेदन से पूर्व ओटीआर को अनिवार्य करने के पीछे 40 प्रतिशत अनारक्षित कोटा को सामान्य वर्ग के लिए एक तरह से आरक्षित करने का षडयंत्र है।उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) जल्द ही कई बड़ी भर्तियां शुरू करने की तैयारी में है। आयोग की ओर से अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि भर्तियां शुरू होने से पूर्व सभी अभ्यर्थी अनिवार्य रूप से वन टाइम रजिस्ट्रेशन (ओटीआर) करा लें। बिना ओटीआर अभ्यर्थियों के आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। यूपीपीएससी की ओर से सम्मिलित राज्य कृषि सेवा परीक्षा, अपर निजी सचिव (एपीएस) परीक्षा, समीक्षा अधिकारी (आरओ) /सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) भर्ती परीक्षा सहित अन्य प्रमुख भर्तियां जल्द ही शुरू की जा सकती हैं। इन भर्तियों के लिए आयोग को रिक्त पदों का अधियाचन भी मिल चुका है। कुछ भर्तियों में अर्हता स्पष्ट नहीं है, जबकि कुछ भर्तियों में समकक्ष अर्हता को लेकर शासन स्तर से स्थिति स्पष्ट की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि ओबीसी, एससी, एसटी वर्ग का अभ्यर्थी अगर अपने वर्ग में ओटीआर करा लिया तो उच्च मेरिट के बाद भी अनारक्षित श्रेणी की बजाय अपने ही कोटे तक सीमित हो जाएगा। वन टाइम रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता पूरी तरह आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों के साथ नाइंसाफी है और इस व्यवस्था से 40 प्रतिशत अन रिजर्व को सामान्य वर्ग के लिए खुला मैदान छोड़ना है।निषाद ने बताया कि आयोग की सभी भर्ती परीक्षाओं में एक अप्रैल 2023 से अभ्यर्थियों के लिए ओटीआर अनिवार्य कर दिया गया है। आयोग की बड़ी भर्तियों में छह से सात लाख अभ्यर्थी शामिल होते हैं, जबकि ओटीआर कराने वाले अभ्यर्थियों की संख्या अभी इससे कम है। आयोग ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि संबंधित भर्तियों का विज्ञापन जारी होने से पहले ओटीआर की प्रक्रिया पूरी करके ओटीआर नंबर अनिवार्य रूप से प्राप्त कर लें, जिससे विज्ञापन की अवधि में ऑनलाइन आवेदन से वंचित न रह जाएं। आयोग के परीक्षा नियंत्रक अजय कुमार तिवारी के अनुसार भविष्य में ओटीआर नंबर प्राप्त न करने के कारण अगर कोई अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन से वंचित रह जाता है, तो इसके लिए अभ्यर्थी स्वयं जिम्मेदार होगा। इसके अलावा आयोग स्टाफ नर्स (पुरुष/महिला) के 2240 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने जा रहा है। अगस्त के दूसरे सप्ताह में इस भर्ती का विज्ञापन जारी किए जाने की तैयारी है। स्टाफ नर्स की भर्ती में भी आवेदन के लिए ओटीआर अनिवार्य किया गया है।निषाद ने बताया कि मण्डल कमीशन की सिफारिश में व्यवस्था दी गई है कि खुली प्रतियोगी परीक्षा में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का कट ऑफ यदि सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के बराबर या अधिक होगा तो उनका समायोजन अनारक्षित कोटा किया जाएगा। मण्डल कमीशन के संबंध में इंदिरा साहनी वनाम भारत सरकार (एआईआर 477) के 16 नवम्बर 1992 के निर्णय में 9 जजों की पूर्ण पीठ ने दो तिहाई बहुमत से दिए गए निर्णय में भी कहा कि मेरिटधारी ओबीसी अनारक्षित में समायोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार येन-केन- प्रकारेण आरक्षित वर्ग को कोटे तक ही सीमित करने की साज़िश में पूरी तरह जुटी हुई है। संविधान के अनुच्छेद 15(4),16(4),16(4-1) के अनुसार सभी वर्गों को समुचित प्रतिनिधित्व दिए जाने की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि जब एससी और एसटी को कार्यपालिका और विधायिका में समानुपातिक कोटा है तो 54 प्रतिशत से अधिक ओबीसी को मात्र 27 प्रतिशत कार्यपालिका में कोटा न्यायसंगत नहीं है। उन्होने कहा कि अशासकीय महाविद्यालयों में प्राचार्य भर्ती, प्रोफेसर भर्ती, मेडिकल ऑफिसर भर्ती, आई टेस्टिंग ऑफिसर भर्ती, लेखपाल भर्ती, ग्राम पंचायत अधिकारी आदि भर्ती विज्ञापनों में खुले तौर पर ओबीसी, एससी, एसटी को कोटे से कम सीटें दी गईं, जो पदों की खुली डकैती है।निषाद ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में एसोसिएट प्रोफेसर व असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए जारी विज्ञापन पर आपत्ति जताई है। विज्ञापन के अनुसार अभ्यर्थी नेट, स्लेट और सेट जिस वर्ग में उत्तीर्ण हुए हैं, उसमें ही आवेदन कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की ओर से प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। इसमें एक कॉलम में यह लिखा है कि अभ्यर्थी ने जिस वर्ग में नेट, स्लेट और सेट परीक्षा उत्तीर्ण की है, वह केवल उसी वर्ग की सीटों पर आवेदन कर सकता है। ऐसे में जिन अभ्यर्थियों ने ओबीसी, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस कैटेगरी में परीक्षा उत्तीर्ण की है, वह अनारक्षित सीट पर अपनी दावेदारी प्रस्तुत नहीं कर सकता है। उनका कहना है कि विज्ञापन में जारी नोट किसी भी तरह से सांविधानिक व न्यायोचित नहीं है। यह वर्ग विशेष को अतिरिक्त लाभ देने और उनके लिए 50 फीसदी सीटें सुरक्षित रखने का सुनियोजित षड्यंत्र है। इस तरह के असांविधानिक नियम को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए और सभी वर्ग के अभ्यर्थियों को अनारक्षित सीट पर दावेदारी प्रस्तुत करने का मौका दिया जाए।

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Author: cnindia

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