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आगरा विजय दिवस को शौर्य दिवस के रुप में मनाया

परोपकार सामाजिक सेवा संस्था द्वारा गांव तोछीगढ़ में आज शौर्य दिवस के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम में ग्रामीण युवाओं ने भरतपुर नरेश महाराज सूरजमल जी एवं अमर शहीद वीर गोकुला जाट के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और अपने पुरखों की वीरता को स्मरण किया। संस्था के अध्यक्ष जतन चौधरी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि लगातार 681 साल तक गुलामी की जंजीरों में जकड़ा व मुगलिया अत्याचारों के समक्ष बेबस आगरा को अदम्य शौर्य व साहस के प्रतीक भरतपुर नरेश महाराजा सूरजमल ने 12 जून 1761 को मुगलों को युद्ध में परास्त कर आगरा को आजाद करा लिया था। इसके बाद भरतपुर शासकों ने आगरा पर 1774 तक शासन किया था। आगरा किले पर उस समय फाजिल्‍का खां का कब्‍जा था। मुक्‍त कराने के बाद आगरा में अनेक निर्माण कार्य कराए गए। मुगलों द्वारा तोड़े गए मंदिरों का जीर्णोद्धार किया और अनेक बाग बगीचे लगवाए। आगरा किले पर महाराजा सूरजमल का अधिकार बहुत ही भावुक भरा था क्योंकि 1जनवरी 1670 को उन्हीं के पूर्वज वीर गोकुला व उनके चाचा उदय सिंह को औरंगजेब ने आगरा कोतवाली में अंग-अंग काटकर मृत्यु दण्ड दिया गया था। इसलिए आगरा विजय को वीर गोकुला और उनके चाचा उदय सिंह की शहादत का बदला भी माना जाता है। वैसे भी भरतपुर ही एकमात्र ऐसी रियासत है जिसे कोई जीत नहीं सका था। भरतपुर के संस्थापक महान योद्धा महाराज सूरजमल एवं उनके वंशजों ने भरतपुर और अपने पुरखों की शान को बनाए रखने के लिए अदम्य शौर्य और पराक्रम का परिचय देते हुए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था। इस अवसर पर चौधरी राजेंद्र सिंह, राजू ठकुरेला, मनवीर सिंह, प्रशांत ठैनुआं, गौरव चौधरी, पंकज कुमार, चिंटू, सूरज, चित्तर सिंह, दीपक सिंह, कान्हा, पुष्पेन्द्र सिंह, आकाश आदि मौजूद रहे।

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Author: cnindia

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