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गौ माता के चरणों की धूल से मांग भरने पर सुहाग की उम्र बढ़ती है।गौ माता की कमर पर हाथ फेरने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है गौ मांस खाने वाले कभी भी सुखी नहीं रह सकते-स्वामी नंदिनी सरस्वती।

अजमेर के कोटड़ा क्षेत्र के बीके कौल नगर स्थित प्राचीन बालवीर हनुमान मंदिर परिसर में इन दिनों धेनूमानस कथा चल रही है। सुप्रसिद्ध गौ कथा वाचक गोपाल मणि की शिष्या स्वामी नंदिनी सरस्वती रोजाना चार से सात बजे तक गौ माता की महिमा पर प्रवचन दे रही हैं। चूंकि सनातन संस्कृति में गौ माता का दर्जा देवी-देवताओं से ऊपर है इसलिए भागवत और रामकथा में रुचि रखने वाले श्रद्धालु भी गौ कथा को गंभीरता के साथ सुन रहे हैं। 16 जून को मुझे और मेरी पत्नी श्रीमती अंचला मित्तल को भी गौ कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसके लिए मैं कथा के आयोजक और मंदिर के उपासक भूपेश सांखला, सुभाष काबरा, इंजीनियर अशोक शर्मा, महेंद्र जैन मित्तल, राजेंद्र मित्तल, राजेंद्र गांधी, मोहनलाल खंडेलवाल आदि का आभारी हंू। आयोजकों ने मुझे स्वामी नंदिनी सरस्वती के हाथों से गौ माता का प्रतीक चिह्न भी दिलवाया। कथा में नङ्क्षदनी ने कहा कि गौ माता का मनुष्य के जीवन में महत्वपूर्ण योगदान है। गौ माता की वजह से मनुष्य न केवल स्वस्थ रह सकता है, बल्कि बुराईयों से भी बच सकता है। जो लोग प्रतिदिन अपने माता-पिता के साथ साथ गौ माता के चरण स्पर्श करते हैं, उन्हें जीवन में गंभीर कठिनाई नहीं होती। भागवत और राम कथा में गौ माता के बारे में जो जानकारी दी गई है उसे भी गौ कथा में सुनाया जा रहा है। नंदिनी ने कहा कि भागवत तो गौ माता पर ही आधारित है। भगवान श्रीकृष्ण ने गायों को चरा कर ही चमत्कार किए। कृष्ण के जीवन में गाय के होने से गौ माता के महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है। यदि कृष्ण के पास गाय नहीं होती तो भागवत ग्रंथ भी नहीं होता। हमारे वेदों और ग्रंथों में गाय को हर समस्या के समाधान का सूत्र माना गया है। उन्होंने कहा कि जिस परिसर में गौ माता रहती है, वहां कभी भी रोग का प्रवेश नहीं रह सकता। कोई महिला गौ माता के चरण की धूल अपनी मांग में भरती हैं तो उसके सुहाग की उम्र भी लंबी होती है। यदि किसी विवाहिता का पति अस्पताल में मृत्यु के साथ संघर्ष कर रही है और ऐसी विवाहिता अपनी मांग में गौ माता के चरण की धूल लगाती है तो उसका पति जल्द स्वस्थ होगा। उन्होंने कहा कि गौ माता की पीठ पर हाथ फेरने से ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहता है। हम गौ माता के दूध से अनेक व्यंजन बनाते हैं, जब गौ माता के दूध से बने व्यंजन कितने स्वादिष्ट होते हैं तब गौ माता के साथ रहने का अंदाजा लगाया जा सकता है। नंदिनी सरस्वती ने इस बात पर अफसोस जताया कि कुछ लोग सनातन भारत में रहने के बाद भी गौ मांस का सेवन करते हैं। जिस गाय को हम देवी देवताओं से बड़ा मानते हैं, उसका मांस खाने वाला व्यक्ति कभी भी सुखी नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा मिलना चाहिए। गौ हत्या पर रोक के लिए कानून भी बनना चाहिए

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Author: cnindia

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