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बज्म ए रहबर काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन

दरियाबाद, बाराबंकी। नगर पंचायत दरियाबाद के  मदरसा मोईनुल इस्लाम में बज्म ए रहबर काव्य गोष्ठी का आयोजन रहबर ताबानी दरियाबादी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। जिसमें मुख्य अतिथि  जावेद अख्तर  अलियाबादी एवं  विशिष्ट अतिथि शुऐब अनवर रहे। संचालन अकील जिया ने किया।शुक्रवार को बज्म ए रहबर काव्य गोष्ठी का शुभारम्भ शब्बीर दरियाबादी ने नात ए पाक से किया। जिसमे  श्रोताओं द्वारा पसन्द की गई कविताएं है। ‘‘जब से वह मसनद ए अदल पर आ गएरू जुर्म नाकरदा सब मेरे सर आ गए’ रहबर ताबानी दरियाबादी,ष्हम तरक्की की तहजीब की दौड़ मेंरू जा रहे थे किधर और किधर आ गएष् इमरान अलियाबादी, ष्उन के दीदार की जब तमन्ना हुई रू मूंद ली आँख और वह नजर आ गए ष्नूरऐन चमनवाली, ष्चेहरा रंग ए शफक जुल्फ काली घटा रू चांदनी शब में बाम पर आ गएष् सलीम हमदम रुदौलवी, ष्यार बोहतान पर इस कदर आ गए रू हम उठे और चुपचाप घर आ गए ष्शुऐब अनवर, तेरा दर  छोड़कर दर बदर आ गएरू कुछ पता ही नहीं हम किधर आ गए ” मुजीब रुदौलवी ष्जब हवाओं के जेर ए असर आ गए रू जिनके बाजू ना थे उनके पर आ गए ष् इरशाद बाराबंकवी ष्हमने सच कह दिया बस यही था कसूर रू जितने इल्जाम थे मेरे सर आ गएष् अजीम अलियाबादी ष् छेड़ कर वह तरन्नुम से ताजा गजल रू आज अपना दिखाने हुनर आ गए शकील दरियाबादी ष् जिंदगी जिस जगह हम से टकराई थी रू मौत के हम उसी मोड़ पर आ गए ष्जुनेद अलियाबादी,
इनके अलावा जाहिद बाराबंकवी, अकील जिया, नफीस बाराबंकवी, शब्बीर दरियाबादी, महजर हाशमी, मंसूर सलमानी, शुऐब अंसारी, सरवर बल्हारवी आदि ने अपनी कविताएं पेश किया।इस मौके पर महमूद अहमद इदरीसी, तल्हा महमूद, शेख अजहर अली, सफी हाशमी, हमीद अहमद, मुहम्मद वसीम, मौलाना शकील नदवी, इसरार नेता आदि श्रोतागण मौजूद रहे

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Author: cnindia

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